संवाददाता : अवनीश शर्मा। गैरतगंज

गैरतगंज। नगर में कानून-व्यवस्था की स्थिति चरमरा गई है। सार्वजनिक स्थानों पर शराबियों के बढ़ते दखल ने आम नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों का घर से बाहर निकलना दूभर कर दिया है।
विडंबना यह है कि जिन स्थानों को विकास और जनसुविधा के लिए बनाया गया था, वे अब असामाजिक तत्वों के सुरक्षित अड्डे बन चुके हैं।
इन स्थानों पर शाम ढलते ही सजती हैं महफिलें
नगर के विभिन्न सरकारी और सार्वजनिक परिसरों में शराबियों का जमावड़ा पुलिस प्रशासन की गश्त पर सवालिया निशान लगा रहा है:
शासकीय प्रांगण और ब्लॉक ग्राउंड : नगर के हृदय स्थल माने जाने वाले इन परिसरों में दिन ढलते ही शराबखोरी शुरू हो जाती है। यहां बिखरी शराब की बोतलें और डिस्पोजल प्रशासन की लापरवाही की गवाही देते हैं।
गैरतपुर खेल मैदान : खिलाड़ियों और युवाओं के लिए बना यह मैदान अब नशेड़ियों की शरणस्थली बन गया है। खेल गतिविधियों की जगह यहां नशे का कारोबार फल-फूल रहा है।
पशु चिकित्सालय प्रांगण : अस्पताल परिसर जैसी संवेदनशील जगह पर भी शराबियों का कब्जा है, जिससे कर्मचारियों और पशुपालकों को भारी असुविधा हो रही है।
बीना नदी का पुल : पिकनिक और प्राकृतिक दृश्य के लिए मशहूर बीना नदी का पुल अब शाम के समय असुरक्षित हो गया है। पुल के किनारों पर बैठकर शराब पीना एक आम बात हो गई है।
पुलिस प्रशासन के रवैये पर उठे सवाल
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पुलिस की गश्त केवल मुख्य सड़कों तक सीमित है। भीतरी इलाकों और सरकारी मैदानों में निगरानी न होने के कारण इन तत्वों के हौसले बुलंद हैं।
इनका कहना हैं_
“हम अपने बच्चों को खेल मैदान भेजने से डरते हैं। हर जगह शराब की बोतलें और गाली-गलौज का माहौल है। बार-बार शिकायत के बाद भी कोई स्थाई समाधान नहीं निकला।” — एक स्थानीय निवासी
मुख्य चिंताएं :
असुरक्षा : अंधेरा होते ही इन क्षेत्रों से गुजरने वाली महिलाओं से छेड़खानी का डर बना रहता है।
गंदगी : कांच की टूटी बोतलें मैदानों में खेलने वाले बच्चों के लिए घातक साबित हो रही हैं।
अपराध की आशंका : सरेराह नशाखोरी बड़ी वारदातों (लूट, झगड़ा) का कारण बन सकती है।
