संवाददाता: कृष्ण कांत सोनी। जिला व्यूरो

भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का रसपूर्ण वर्णन
रायसेन जिले की सिलवानी तहसील के ग्राम सियरमऊ में चल रही सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस पर कथा वाचक सत्यम “मधुरम” जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का रसपूर्ण वर्णन करते हुए जीवन में माता-पिता के सम्मान और प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया।l
कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरे वातावरण में भक्ति का भाव बना रहा।
अपने प्रवचन में महाराज ने कहा कि जैसे किसी वृक्ष की जड़ में पानी देने से पूरा वृक्ष हरा-भरा हो जाता है, उसी प्रकार भगवान के सच्चे भक्तों की वाणी और संग से मनुष्य का जीवन सफल और सुखमय हो जाता है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य यदि जीवन में सच्चे मार्ग पर चलना चाहता है तो उसे संतों के उपदेशों को अपनाना चाहिए।
महाराज ने माता-पिता के महत्व पर भी विशेष जोर देते हुए कहा कि यदि माता-पिता दुखी हैं तो संसार के सभी तीर्थों में जाने का भी कोई लाभ नहीं होता।

माता-पिता की सेवा ही सच्चा धर्म
उन्होंने कहा कि सबसे पहले मनुष्य को अपने माता-पिता की सेवा और पूजा करनी चाहिए, उसके बाद ही अन्य कार्य करने चाहिए। माता-पिता की सेवा ही सच्चा धर्म और सबसे बड़ा पुण्य है।
कथा के दौरान उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भी मनोहारी वर्णन किया। महाराज ने कहा कि भगवान कृष्ण को माखन चोर कहा जाता है, लेकिन वे केवल माखन ही नहीं चुराते, बल्कि अपने भक्तों के जीवन के पाप और दुख भी हर लेते हैं।
इसी क्रम में उन्होंने गोवर्धन पूजा का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने प्रकृति और पर्यावरण के महत्व को समझाने के लिए ही गोवर्धन पूजा की परंपरा स्थापित की। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति प्रकृति और पर्यावरण से प्रेम करता है, भगवान उस पर शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
कथा के दौरान श्रद्धालु भगवान के भजनों और जयकारों के साथ भक्ति में लीन दिखाई दिए। आयोजन समिति और शाह परिवार द्वारा कथा स्थल पर श्रद्धालुओं के लिए समुचित व्यवस्थाएं की गई हैं और प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं। पूरे गांव में इस धार्मिक आयोजन को लेकर उत्सव जैसा वातावरण बना हुआ है।
