संवाददाता: रितिक जैन । बाड़ी

नारी सम्मान से ही समाज का उत्थान
बाड़ी, रायसेन। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर बाड़ी में महिलाओं के सम्मान, आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण को लेकर प्रेरणादायक विचार सामने आए। एसडीओपी बाड़ी नीलम चौधरी ने कहा कि समाज में वास्तविक परिवर्तन तभी संभव है जब महिलाओं को बराबरी का सम्मान, सुरक्षा और अवसर मिले।
उन्होंने कहा कि किसी भी देश या समाज की प्रगति केवल आर्थिक विकास से नहीं मापी जाती, बल्कि इस बात से तय होती है कि वहां महिलाओं की स्थिति क्या है। भारतीय संस्कृति में भी नारी सम्मान को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता” का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जहां नारी का सम्मान होता है, वहीं समृद्धि और खुशहाली का वास होता है।
एसडीओपी नीलम चौधरी ने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब-जब महिलाओं ने साहस, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़कर जिम्मेदारी निभाई है, तब-तब समाज में सकारात्मक बदलाव आया है। प्राचीन भारत में गार्गी और मैत्रेयी जैसी विदुषियों ने ज्ञान की परंपरा को आगे बढ़ाया, वहीं रानी लक्ष्मीबाई ने वीरता और स्वाभिमान की मिसाल पेश कर पूरे देश को प्रेरित किया।

महिला दिवस के अवसर पर वार्ड नंबर 11 बाड़ी की अधिवक्ता प्रीति राय ने कहा कि महिला दिवस केवल एक उत्सव नहीं बल्कि महिलाओं की शक्ति, पहचान और आत्मनिर्भरता को समझने का अवसर है। उन्होंने कहा कि जीवन में आने वाले संघर्ष हमें मजबूत बनाते हैं और आत्मविश्वास ही महिलाओं की सबसे बड़ी ताकत है।
प्रीति राय ने कहा कि आज डिजिटल युग में युवाओं के पास असीमित अवसर हैं। सही दिशा में मेहनत और ज्ञान से महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं। उन्होंने महिलाओं को आर्थिक रूप से जागरूक बनने, अपने वित्तीय निर्णय स्वयं लेने और कानूनी अधिकारों के प्रति सजग रहने की भी सलाह दी।
उन्होंने बताया कि परिवार परामर्श केंद्र (फैमिली काउंसलिंग सेंटर) से जुड़कर उन्हें समाज की कई वास्तविकताओं को समझने का अवसर मिला और संवाद व समझदारी के माध्यम से टूटते परिवारों को फिर से जोड़ना उनके लिए संतोषजनक अनुभव रहा।
महिला दिवस के अवसर पर दोनों ने बेटियों और महिलाओं से आह्वान किया कि वे अपनी मौलिकता बनाए रखें, अपने सपनों पर विश्वास रखें और यह समझें कि वे केवल घर की जिम्मेदारी ही नहीं संभालतीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के निर्माण में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
आज की नारी शिक्षा, आत्मविश्वास और संकल्प के बल पर हर क्षेत्र में नई पहचान बना रही है और यही परिवर्तन आने वाले समय में समाज को नई दिशा देगा।
