यहां चलना मानो किसी एडवेंचर गेम का लेवल पार करना हो—
संवाददाता: अशोक सोनी। बरेली

हर कदम पर कीचड़, हर मोड़ पर पानी का जाल, और हर सफर में गिरने का डर।
बारिश क्या हुई, सड़क ने अपनी असलियत दिखा दी। जगह-जगह गड्ढे ऐसे मुंह खोले बैठे हैं जैसे राहगीरों को निगल जाने की तैयारी में हों।
बाइक सवार हों या पैदल चलने वाले, सभी के लिए यह रास्ता किसी सजा से कम नहीं।
स्थानीय लोग बताते हैं कि रोज़ाना इसी सड़क से गुजरना अब मजबूरी नहीं, मजबूरी का नाम “संघर्ष” हो गया है। बच्चों का स्कूल जाना हो या मरीज को अस्पताल ले जाना—हर बार जान जोखिम में डालनी पड़ती है।
कई बार तो लोग कीचड़ में फिसलकर चोटिल भी हो चुके हैं, लेकिन जिम्मेदारों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही।
सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है ?
या फिर यह सड़क भी सिर्फ कागजों में ही “ठीक” घोषित कर दी गई है?
अगर यही हाल रहा तो जल्द ही यह मार्ग विकास की नहीं, बल्कि लापरवाही की पहचान बन जाएगा। अब देखना यह है कि जिम्मेदार जागते हैं या फिर जनता यूं ही कीचड़ में फंसकर अपने हालात को कोसती रहेगी…
