संवाददाता: अशोक सोनी। बरेली

गंदगी और अंधेरे में पड़ी वृद्धा को गोद में उठाकर पहुंचाया सुरक्षित आश्रय, इंसानियत की मिसाल बनी साँईखेड़ा पुलिस
नरसिंहपुर जिले के ग्राम तूमड़ा से सामने आई एक तस्वीर ने पुलिस की वर्दी के पीछे छिपे संवेदनशील चेहरे को फिर साबित कर दिया। जहां अक्सर पुलिस पर सवाल उठते हैं।
वहीं थाना साँईखेड़ा की महिला उपनिरीक्षक वर्षा धाकड़ और उनकी टीम ने ऐसा काम किया, जिसने हर संवेदनशील इंसान को भावुक कर दिया।
क्या है पूरा मामला
ग्राम पंचायत के पुराने बंद कमरे में गंदगी के बीच खटिया पर पड़ी एक दृष्टिहीन वृद्ध महिला, न देखने वाला कोई, न सहारा देने वाला कोई।
जिंदगी मानो धीरे-धीरे हार मान चुकी थी। तभी नरसिंहपुर पुलिस वहां पहुंची और उस बेसहारा महिला के लिए फरिश्ता बन गई।
11 मई को निर्भया मोबाइल को सूचना मिली कि ग्राम तूमड़ा में एक वृद्ध महिला बेहद खराब हालत में रह रही हैं। सूचना मिलते ही थाना साँईखेड़ा पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची।
वहां जो दृश्य था, उसने पुलिस टीम को भी भीतर तक झकझोर दिया। लगभग 75 वर्षीय सब्बो बाई पति स्वर्गीय रामरतन पटैल, दोनों आंखों से दृष्टिहीन, कमजोर और पूरी तरह असहाय अवस्था में मिलीं। हालत ऐसी कि खुद से उठना-बैठना तक संभव नहीं था।
ग्रामीणों ने बताया कि उनका कोई देखभाल करने वाला नहीं है और लंबे समय से वे इसी तरह निराश्रित जीवन जी रही थीं।
थाना प्रभारी निरीक्षक संधीर चौधरी ने बिना देर किए मदद का फैसला लिया। महिला उपनिरीक्षक वर्षा धाकड़, आरक्षक दिनेश पटैल और निर्भया मोबाइल स्टाफ ने पहले वृद्ध महिला को भोजन कराया, फिर नए कपड़े उपलब्ध कराए। इसके बाद सबसे भावुक दृश्य तब सामने आया, जब वर्षा धाकड़ और टीम ने महिला को गोद में उठाकर वाहन तक पहुंचाया।
इसके बाद रायसेन जिले के बाड़ी स्थित “टीम पहल सेवा आश्रम” से संपर्क कर महिला को सुरक्षित वहां भर्ती कराया गया, जहां अब उनका इलाज और देखभाल की जाएगी।
सुहागपुर में अपनी कार्यशैली और संवेदनशील व्यवहार के लिए पहचानी जाने वाली महिला उपनिरीक्षक वर्षा धाकड़ ने एक बार फिर साबित कर दिया कि पुलिस सिर्फ कानून व्यवस्था संभालने वाली संस्था नहीं, बल्कि जरूरतमंदों के लिए सबसे बड़ा सहारा भी बन सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद क्षेत्रभर में नरसिंहपुर पुलिस की जमकर सराहना हो रही हैं।
