संवाददाता : रितिक जैन। बाड़ी

सिंगोरी अभ्यारण–रातापानी वन्यजीव अभयारण्य कॉरिडोर में सुरक्षा पर सवाल, 4 साल बाद भी काम अधूरा
बाड़ी : नेशनल हाईवे NH-45 पर ग्राम पीपल वाली के आसपास फेंसिंग कार्य में गंभीर लापरवाही सामने आई है।
मौके पर सड़क किनारे सीमेंट के खंभे तो लगाए गए हैं, लेकिन उनमें तार जाली नहीं लगाई गई है, जिससे वन्य जीवों और राहगीरों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं।
क्या है पूरा मामला_
हाईवे किनारे लंबी दूरी तक सिर्फ सीमेंट के खंभे दिखाई दे रहे हैं खंभों में कहीं भी तार या जाली नहीं लगी फेंसिंग अधूरी होने से सुरक्षा व्यवस्था कमजोर।

संवेदनशील वन्यजीव कॉरिडोर
यह क्षेत्र सिंगोरी अभ्यारण और रातापानी वन्यजीव अभयारण्य के बीच स्थित है, जहां जंगली जानवरों की आवाजाही लगातार बनी रहती है।
फेंसिंग न होने के कारण वन्य जीव सीधे सड़क पर आ जाते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
पहले भी हो चुका हादसा
ग्राम पीपल वाली के पास पूर्व में एक तेंदुआ वाहन की टक्कर का शिकार हो चुका है। इसके बावजूद सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए।

4 साल बाद भी अधूरा काम
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस हाईवे का निर्माण करीब 4 वर्ष पहले हुआ था, लेकिन अब तक फेंसिंग का कार्य पूरा नहीं हो पाया है।
साथ ही, इन वर्षों में कितने वन्य जीव हादसों का शिकार हुए, इसका कोई स्पष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
उठ रहे हैं सवाल_
क्या फेंसिंग की जाली सिर्फ कागजों में लगाई गई?क्या बिना कार्य पूर्ण हुए भुगतान किया गया?जिम्मेदार विभाग निगरानी में क्यों विफल रहे?
नियमों की अनदेखी का आरोप
विशेषज्ञों के अनुसार, वन क्षेत्र से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर फेंसिंग, चेतावनी संकेत और वन्य जीवों के सुरक्षित पार मार्ग आवश्यक होते हैं।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत वन्य जीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।
जिम्मेदारी किसकी ?
हाईवे निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की होती है, जबकि वन क्षेत्र में कार्यों की निगरानी वन विभाग द्वारा की जाती है।
ऐसे में दोनों विभागों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
अधिकारी ने टाला जवाब
इस संबंध में वन विभाग के एसडीओ मयंक राज से दूरभाष पर संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने तत्काल जानकारी देने से इनकार करते हुए “एक-दो दिन बाद मिलने” की बात कही।
निष्कर्ष_
NH-45 पर अधूरी फेंसिंग अब सिर्फ एक तकनीकी कमी नहीं, बल्कि सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन गई है।
जरूरत है कि संबंधित विभाग इस मामले की जांच कर फेंसिंग कार्य को जल्द पूरा करें, ताकि वन्य जीवों और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
