संवाददाता : रितिक जैन। बाड़ी

एमआरपी की खुली लूट या आबकारी विभाग की चुप्पी.?
सुल्तानपुर/रायसेन। सुल्तानपुर की शराब दुकान पर उपभोक्ताओं की जेब पर खुलेआम डाका डाले जाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि दुकान पर शराब की बोतलें और क्वार्टर निर्धारित एमआरपी से अधिक कीमत पर बेचे जा रहे हैं, जबकि ग्राहकों को न तो बिल दिया जा रहा है और न ही दुकान पर किसी प्रकार की रेट लिस्ट प्रदर्शित की गई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार 75 रुपये एमआरपी अंकित सफेद शराब का क्वार्टर 90 रुपये में बेचा जा रहा है। वहीं बीयर सहित अन्य मदिरा उत्पादों पर भी निर्धारित मूल्य से अधिक रकम वसूले जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। सवाल यह है कि जब बोतल पर स्पष्ट रूप से एमआरपी लिखी हुई है तो आखिर अतिरिक्त वसूली किसके इशारे पर और किस अधिकार से की जा रही है?
ग्राहकों ने लगाए आरोप
जब उन्होंने खरीदारी का बिल मांगा तो दुकान कर्मचारियों ने साफ शब्दों में कह दिया कि “हम बिल नहीं देते।” यदि यह आरोप सही हैं तो यह केवल उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन नहीं बल्कि पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
दुकानों से गायब हुई रेट लिस्ट
सबसे हैरानी की बात यह है कि दुकान पर कहीं भी रेट लिस्ट प्रदर्शित नहीं दिखाई दी। ऐसे में ग्राहक यह कैसे तय करे कि उससे सही कीमत ली जा रही है या नहीं? क्या शराब दुकानें अब नियमों से ऊपर चल रही हैं? क्या विभागीय निरीक्षण केवल कागजों तक सीमित रह गया है?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि हर बोतल पर कुछ रुपये अतिरिक्त लिए जाएं तो प्रतिदिन हजारों रुपये की अतिरिक्त वसूली संभव है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि आखिर यह पैसा कहां जा रहा है और इसकी जवाबदेही किसकी है।

मामले में आबकारी विभाग के उप निरीक्षक गौरव भद्रसेन ने कहा कि यदि दुकान पर ओवररेटिंग की शिकायत सही पाई जाती है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर नियम अनुसार कार्रवाई होगी।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या यह केवल एक दुकान का मामला है या पूरे क्षेत्र में शराब उपभोक्ताओं से इसी तरह अतिरिक्त रकम वसूली जा रही है? क्या आबकारी विभाग इस कथित लूट पर लगाम लगाएगा या फिर जांच भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगी?
फिलहाल उपभोक्ताओं को जांच रिपोर्ट और कार्रवाई का इंतजार है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने शराब दुकानों की कार्यप्रणाली और विभागीय निगरानी पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
