संवाददाता: अशोक सोनी। बरेली

शहर पिपरिया में आउटसोर्स बिजली लाइनमैन भाई केतन केवट जी की करंट लगने से हुई दुखद मृत्यु ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि उस लापरवाही का परिणाम है जो वर्षों से आउटसोर्स कर्मचारियों के साथ होती आ रही है।
बिजली विभाग में कार्यरत ये आउटसोर्स कर्मचारी दिन-रात अपनी जान जोखिम में डालकर सेवा देते हैं, लेकिन जब बात उनकी सुरक्षा, प्रशिक्षण और भविष्य की आती है, तो सिस्टम मौन हो जाता है।
न पर्याप्त सुरक्षा उपकरण, न स्थायी नौकरी की गारंटी, और न ही दुर्घटना होने पर उचित मुआवजा—क्या यही उनका मूल्य है?
सरकार और संबंधित विभागों से कुछ सीधे सवाल—
🔸 क्या हर कर्मचारी को आवश्यक सुरक्षा उपकरण (सेफ्टी किट) उपलब्ध कराए जा रहे हैं?
🔸 क्या उन्हें कार्य के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जाता है?
🔸 दुर्घटना होने पर उनके परिवार के लिए क्या स्थायी व्यवस्था है?
अब समय आ गया है कि सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाए—
✅ आउटसोर्स कर्मचारियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए
✅ सभी लाइनमैन को अनिवार्य रूप से सेफ्टी गियर और आधुनिक उपकरण दिए जाएं
✅ दुर्घटना बीमा और उचित मुआवजा सुनिश्चित किया जाए
✅ लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों के लिए स्थायीकरण की नीति बनाई जाए
एक मजदूर की मौत सिर्फ एक आंकड़ा नहीं होती, वह एक परिवार की दुनिया उजड़ने जैसा होता है।
प्रशासन से विनम्र निवेदन है भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।
अब और नहीं… हर कर्मचारी की जान की कीमत है।
