शिक्षा विभाग की ‘घोर लापरवाही’ ने बच्चों के भविष्य को किया अंधकारमय
संवाददाता: अवनीश शर्मा। गैरतगंज

आगामी सोमवार से छात्रों की लोकल परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं। छात्रों की धड़कनें तेज हैं और वे अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। लेकिन, शिक्षा विभाग की ‘अंधेरगर्दी’ देखिए—परीक्षा की इस निर्णायक घड़ी में ‘शिक्षा के मंदिर’ माने जाने वाले स्कूलों पर ताले लटके हुए है।

क्या शिक्षा विभाग को नहीं है छात्रों के भविष्य की चिंता ?
परीक्षा के ठीक पहले स्कूलों का बंद होना न केवल नियमों की अनदेखी है, बल्कि यह उन हजारों छात्रों के साथ एक क्रूर मजाक भी है जिन्हें अंतिम समय में शिक्षकों के मार्गदर्शन की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। जब छात्रों को अपनी शंकाएं (doubts) दूर करने के लिए शिक्षकों के पास होना चाहिए था, तब वे स्कूलों के बंद गेटों के सामने खड़े होकर केवल हताशा ही देख पा रहे हैं।

आखिर जिम्मेदार कौन?
शिक्षा विभाग के आला अधिकारी अपनी एयरकंडीशन कमरों में आराम फरमा रहे हैं, जबकि धरातल पर स्थिति यह है कि:
मार्गदर्शन का अभाव: छात्र अपनी समस्याओं को सुलझाने के लिए शिक्षकों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं।
मनोवैज्ञानिक दबाव: परीक्षा से ऐन पहले स्कूलों का बंद होना बच्चों और उनके अभिभावकों में अनावश्यक तनाव और असुरक्षा की भावना पैदा कर रहा है।
प्रशासनिक सुस्ती: क्या विभाग को इस बात की खबर नहीं है कि सोमवार से परीक्षाएं हैं ? या फिर यह लापरवाही जानबूझकर की गई है ?
यह स्थिति किसी बड़े घोटाले से कम नहीं
स्कूलों के ताले यह चिल्ला-चिल्लाकर कह रहे हैं कि शिक्षा विभाग के लिए छात्रों का भविष्य केवल कागजों तक सीमित है। अभिभावकों का कहना है कि अगर परीक्षाएं सोमवार को हैं, तो आज स्कूल बंद करने का आदेश किसने और किन परिस्थितियों में दिया?

अब सवाल यह है_
शिक्षा विभाग की इस घोर लापरवाही पर कौन जवाब देगा ? क्या विभाग अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेगा, या फिर छात्रों के भविष्य के साथ हो रहे इस खिलवाड़ पर कोई कार्रवाई की जाएगी?
जनता और छात्र अब शिक्षा विभाग के जवाब का इंतजार कर रहे हैं।
इनका कहना है:
सोमवार से लोकल परीक्षा चालू होनी है अगर ऐसे में स्कूल बंद है तो ये बड़ी लापरवाही है हम बीआरसी और जनशिक्षक को बोलकर जांच करवाते है।
आशीष सिंह चौहान
विकासखंड शिक्षा अधिकारी गैरतगंज
