गैरतगंजः सिविल अस्पताल गैरतगंज में स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलती एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। बीती रात समय पर रेफर वाहन न मिलने के कारण एक नवजात शिशु की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि एंबुलेंस के लिए घंटों मिन्नतें करने के बाद भी मदद नहीं पहुंची, जिसके चलते पहली संतान की खुशी मातम में बदल गई।

जानकारी के अनुसार, ग्राम आवरियां निवासी राजेश चढ़ार अपनी गर्भवती पत्नी जानकी को प्रसव पीड़ा होने पर सोमवार शाम करीब 8 बजे सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे थे। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने रात 11 बजे उन्हें जिला अस्पताल रायसेन के लिए रेफर कर दिया।परिजनों ने बताया कि उन्होंने 108 एंबुलेंस को दर्जनों बार फोन लगाया, लेकिन उन्हें हर बार झूठा आश्वासन दिया गया कि गाड़ी आ रही है। तड़के 2 बजे तक जब कोई वाहन नहीं पहुंचा, तो मजबूरी में जानकी की डिलीवरी सिविल अस्पताल में ही करानी पड़ी, जहां नवजात मृत अवस्था में पैदा हुआ। राजेश ने बताया कि यह उनकी पहली संतान थी। अगर समय पर एंबुलेंस मिल जाती तो आज बच्चा जिंदा होता। एंबुलेंस चालक झूठ बोलते रहे कि गाड़ी आ रही है, जबकि गाड़ियां पास में ही खड़ी थीं।

सिस्टम की लाचारी: 180 गांव और मात्र दो एंबुलेंस
तहसील के करीब 180 गांव स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर केवल दो ‘108’ वाहनों के भरोसे हैं। इस मामले में बीएमओ संदीप यादव का तर्क है कि अस्पताल में उपलब्ध वाहन पंचर होने के कारण प्रसूता को नहीं ले जा सका।
हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि यह लापरवाही का पहला मामला नहीं है; इससे पहले भी एक पूर्व पार्षद के नवजात की मौत इसी तरह की अव्यवस्थाओं के चलते हो चुकी है।
जांच का दिया आश्वासन
इस संवेदनशील मामले पर एसडीएम अंकित जैन ने कहा कि घटना की जानकारी मिली है और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से इस संबंध में चर्चा की जा रही है। मामले की विस्तृत जांच के बाद ही दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
जिले भर मे एंबुलेंस की हालत खस्ता
आपको बता दें कि रायसेन जिले मे अधिकांश डायल 108 और जननी एक्सप्रेस खस्ता हालत में चल रही हैं। कुछ मे स्टेपनी टायर नही है तो कुछ मे तो आक्सीजन व्यवस्था तक नही है। इतने के बाद भी कभी समय पर अस्पताल में उपलब्ध नहीं हो पाती।
