संवाददाता : रितिक जैन | बाड़ी, जिला रायसेन

बाड़ी तहसील के बाबई जोड़ क्षेत्र में संचालित राइस मिल का मामला अब सिर्फ स्थानीय शिकायत या एक निरीक्षण तक सीमित नहीं रहा। यह मामला पर्यावरण कानूनों के खुले उल्लंघन, प्रशासनिक ढिलाई और कार्रवाई की वास्तविक मंशा पर बड़ा सवाल बनकर सामने आया है। खबर सामने आने के बाद मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया, सैंपल लिए और निर्देश भी दिए, लेकिन ज़मीनी हालात अब भी जस के तस बने हुए हैं।
खेतों में गंदा पानी, हवा में राख और धूल
स्थानीय किसानों और ग्रामीणों के अनुसार राइस मिल से निकलने वाला काला व दुर्गंधयुक्त औद्योगिक अपशिष्ट जल आसपास के खेतों में छोड़ा जा रहा है, जिससे फसलों को नुकसान हो रहा है। बॉयलर से निकलने वाली राख सड़क और खेतों में उड़ रही है, वहीं भूसी और धूल से पूरा क्षेत्र प्रदूषित हो चुका है। निरीक्षण के बावजूद न तो मिल का संचालन रोका गया और न ही कोई सार्वजनिक दंडात्मक कार्रवाई सामने आई।

पंचायत का नोटिस, प्रशासनिक वैधता पर सवाल
मामले में नया मोड़ तब आया जब ग्राम पंचायत रानीपुराकुर्द ने राइस मिल प्रबंधन को आधिकारिक नोटिस जारी किया। पंचायत ने मिल से उद्योग की वैध अनुमति, प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्थाओं का विवरण, पंचायत सीमा में संचालन की वैधानिक स्थिति और शुल्क व स्वीकृतियों से जुड़ी जानकारी मांगी है। नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि समय-सीमा में जवाब नहीं देने पर पंचायत स्तर पर कार्रवाई की जाएगी। इससे साफ है कि मामला अब केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि प्रशासनिक वैधता का भी बन चुका है।
स्कूल और बच्चों की सेहत पर असर
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि राइस मिल के पास संचालित एक गुरुकुल पद्धति स्कूल प्रदूषण से प्रभावित हो रहा है। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि धूल और बदबू के कारण बच्चों को सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन और एलर्जी की शिकायतें बढ़ रही हैं। नियमों के अनुसार किसी भी उद्योग को आबादी और शैक्षणिक संस्थानों के पास विशेष सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य होता है, ऐसे में यह पहलू मामले को और गंभीर बना देता है।

राइस मिल पर लागू प्रमुख नियम और कानून
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार भारत में राइस मिल जैसे उद्योगों पर कई सख्त नियम लागू होते हैं—
1.जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974बिना उपचारित औद्योगिक अपशिष्ट जल को खेत, नाले या खुले स्थान पर छोड़ना अपराध है। इसके लिए अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र (ETP) अनिवार्य है।
2. वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981बॉयलर, चिमनी और धूल उत्सर्जन के लिए साइक्लोन, बैग फिल्टर जैसे नियंत्रण उपकरण अनिवार्य हैं। राख और धूल का खुले में उड़ना नियमों का उल्लंघन माना जाता है।
3. पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986यह अधिनियम सभी पर्यावरणीय नियमों का आधार है। इसके तहत मानकों के उल्लंघन पर जुर्माना, संचालन बंद और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
Consent to Establish और Consent to Operate (एनओसी)किसी भी राइस मिल को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से स्थापना और संचालन की अनुमति लेना अनिवार्य है। बिना वैध एनओसी के मिल का संचालन गैरकानूनी है।
ठोस अपशिष्ट और बॉयलर राख प्रबंधनराख का वैज्ञानिक निस्तारण, बंद भंडारण और परिवहन आवश्यक है। सड़क या खेत में राख फैलना नियमों के खिलाफ है।
नियमों के उल्लंघन की स्थिति में भारी पर्यावरण क्षतिपूर्ति, मिल सील करने, बिजली-पानी काटने और कानूनी कार्रवाई तक का प्रावधान है।
सबसे बड़ा सवाल
अब तक की स्थिति में— खबर सामने आई,निरीक्षण हुआ,पंचायत ने नोटिस जारी किया,लेकिन— जमीन पर सुधार क्यों नहीं दिख रहा.?
कार्रवाई सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही.?
क्या पूरा मामला केवल कागजी औपचारिकता बनकर रह जाएगा.?
यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि मामला किसानों की फसल, बच्चों की सेहत और प्रशासन की जवाबदेही से जुड़ा है।
निष्कर्ष
बाड़ी का बाबई जोड़ राइस मिल मामला अब एक उद्योग का नहीं, बल्कि सिस्टम की पारदर्शिता और सख्ती की परीक्षा बन चुका है। अब देखना यह है कि संबंधित विभाग नियमों के अनुसार ठोस कार्रवाई करते हैं या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाता है।
