संवाददाता: अशोक सोनी। बरेली

जब हर विभाग में सख्ती, तो खाद्य सुरक्षा पर नरमी क्यों—आखिर किसकी मेहरबानी या सिस्टम की कमी ?
नर्मदापुरम जिले में जहां एक ओर प्रशासनिक सख्ती और सक्रियता की मिसालें देखने को मिल रही हैं, वहीं दूसरी ओर खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आने लगे हैं।
बाजार में मिलावटी और एक्सपायरी खाद्य पदार्थों की खुलेआम बिक्री की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन कार्रवाई का असर जमीनी स्तर पर नजर नहीं आ रहा।
ऐसे में अब जिले की मुखिया कलेक्टर सोनिया मीणा से विनम्रता के साथ यह सवाल उठना लाजिमी हो गया है कि आखिर इस महत्वपूर्ण विभाग में अपेक्षित सख्ती क्यों दिखाई नहीं दे रही?
जब अन्य विभागों में नियमित निरीक्षण और त्वरित कार्रवाई हो रही है, तो खाद्य सुरक्षा के मामले में यह धीमापन क्यों?
खाद्य विभाग द्वारा समय-समय पर सैंपल तो लिए जाते हैं, लेकिन उनकी जांच रिपोर्ट और उसके बाद की कार्रवाई आम लोगों तक नहीं पहुंचती। इससे लोगों के मन में यह शंका पैदा हो रही है कि कहीं प्रक्रिया केवल औपचारिकता बनकर तो नहीं रह गई है।
जनता के बीच यह चर्चा भी है कि मिलावट के मामलों में बड़ी कार्रवाई—जैसे लाइसेंस निलंबन या सख्त दंड—क्यों सामने नहीं आते। क्या नियमों के पालन में कहीं ढील दी जा रही है, या फिर सिस्टम में ही कोई ऐसी बाधा है, जो कार्रवाई को आगे नहीं बढ़ने देती?
यह सवाल किसी आरोप के रूप में नहीं, बल्कि जनहित और स्वास्थ्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से उठाए जा रहे हैं।
आम नागरिक यह जानना चाहते हैं कि उनकी थाली तक पहुंचने वाले खाद्य पदार्थ सुरक्षित हैं या नहीं, और यदि नहीं, तो उसके लिए जिम्मेदारों पर कब और कैसी कार्रवाई होगी।
अब आवश्यकता है कि इस पूरे विषय पर स्पष्टता आए, जांच प्रक्रिया पारदर्शी बने और जो भी कमियां हैं, उन्हें दूर कर सख्त कदम उठाए जाएं।
क्योंकि यह मुद्दा सिर्फ नियमों का नहीं, बल्कि हर नागरिक के स्वास्थ्य और भरोसे से जुड़ा हुआ है।
