संवाददाता : कृष्ण कांत सोनी। जिला व्यूरो

रायसेन जिले की सिलवानी तहसील के ग्राम सियरमऊ में चल रही सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस पर कथा वाचक सत्यम “मधुरम” जी महाराज ने भक्ति और समभाव का संदेश दिया।
अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि भगवान के दरबार में जाति-पाति का कोई महत्व नहीं होता, वहां केवल सच्ची भक्ति और भाव का मूल्य होता है।
महाराज ने संत वाणी का उल्लेख करते हुए कहा— “जाति पाती पूछत नहीं कोई, हरि को भजे सो हरि को होई।”
उन्होंने समझाया कि जब भगवान किसी भक्त पर कृपा करते हैं तो वे उसकी जाति, कुल या सामाजिक स्थिति नहीं देखते, बल्कि उसके मन की सच्ची श्रद्धा और भक्ति को देखते हैं।
जिस भक्त के हृदय में सच्चा प्रेम और समर्पण होता है, भगवान उसी पर अपनी कृपा बरसाते हैं।
कथा के दौरान उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और भक्त विदुर का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि भगवान ने दुर्योधन के राजमहल में परोसे गए 56 भोग को स्वीकार नहीं किया।
लेकिन अपने परम भक्त विदुर के घर पहुंचे और प्रेम से दिए गए केले के छिलके भी प्रसन्न होकर ग्रहण कर लिए। यह प्रसंग इस बात का प्रतीक है कि भगवान को भोग या वैभव नहीं, बल्कि भक्त का सच्चा भाव प्रिय होता है।
महाराज के इस भावपूर्ण प्रवचन को सुनकर कथा स्थल पर उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा के दौरान भगवान के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
ग्राम सियरमऊ में आयोजित यह सात दिवसीय भागवत कथा 12 मार्च से 18 मार्च तक चल रही है। आयोजन समिति और शाह परिवार द्वारा कथा स्थल पर श्रद्धालुओं के लिए समुचित व्यवस्थाएं की गई हैं।
वहीं प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण और आसपास के क्षेत्रों से लोग कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं। पूरे गांव में इस धार्मिक आयोजन को लेकर उत्साह और भक्ति का माहौल बना हुआ है।
