संवाददाता: रितिक जैन | बाड़ी

गांव-गांव शराब की सप्लाई का कथित खेल!
“शराब दुकान की थी या पूरे इलाके की? आखिर गांव-गांव तक कैसे पहुंच रही हैं शराब की पेटियां?”
रायसेन जिले के बाड़ी क्षेत्र से सामने आए वायरल वीडियो ने पूरे आबकारी अमले की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। एक तरफ शराब की पेटियों से भरी बोलेरो वाहन गांव में पहुंचती दिखाई दे रही है, तो दूसरी ओर एक किराना दुकान से कथित रूप से शराब की बिक्री के दृश्य सामने आए हैं।
इन तस्वीरों ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है और लोगों के बीच एक ही सवाल गूंज रहा है—क्या शराब कारोबारियों के सामने नियम-कानून बौने साबित हो रहे हैं?स्थानीय लोगों का दावा है कि वाहन क्रमांक एमपी 04 जेडजी 1211 में भरी शराब की पेटियां कथित रूप से गांवों में पहुंचाई जा रही थीं।
वीडियो में ग्राम नानपोन में शराब की पेटियां उतारते हुए दृश्य दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। यदि यह सप्लाई वैध थी तो उसका रिकॉर्ड कहां है? किस आदेश के तहत गांवों तक शराब पहुंचाई जा रही थी? और यदि यह अवैध था तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

सवालों के घेरे में पूरा सिस्टम
आबकारी नियमों के अनुसार शराब के भंडारण, परिवहन और बिक्री की स्पष्ट व्यवस्था होती है। लेकिन वायरल वीडियो के बाद लोगों का आरोप है कि बाड़ी क्षेत्र में नियमों की जगह कथित तौर पर मनमानी चल रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि अब शराब खरीदने के लिए लोगों को लाइसेंसी दुकान तक जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। गांवों में ही शराब आसानी से उपलब्ध हो जाती है। यदि यह दावा सही है तो यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि पूरी निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह है।
“जब शराब खुद चलकर गांव पहुंच जाए तो फिर लाइसेंसी दुकान का मतलब क्या रह जाता है?
किराना दुकान से कथित बिक्री ने बढ़ाई हलचल
मामले को और गंभीर बनाती है दूसरी वायरल वीडियो, जिसमें ग्राम कनवार की एक छोटी किराना दुकान से कथित रूप से शराब बिकती दिखाई दे रही है। वीडियो में बियर, सफेद और लाल क्वार्टर की बिक्री का दावा किया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई एक दिन की बात नहीं बल्कि लंबे समय से चल रही व्यवस्था का हिस्सा है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी, लेकिन वायरल वीडियो ने कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
आखिर किसके संरक्षण में चल रहा कथित नेटवर्क?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि गांवों तक शराब पहुंच रही है तो इसके पीछे कौन लोग हैं? क्या यह सब जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी के बिना संभव है? या फिर पूरा मामला किसी बड़े संरक्षण की ओर इशारा करता है?
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि गांवों में शराब की आसान उपलब्धता से युवा पीढ़ी सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है। कई परिवारों ने भी चिंता जताई है कि नशे की बढ़ती पहुंच सामाजिक समस्याओं को जन्म दे रही है।
मीडिया ने पूछा सवाल, जिम्मेदारों ने साधी चुप्पी
मामले में जब बाड़ी आबकारी उपनिरीक्षक सुनील कुमार मीना से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। वहीं जिला आबकारी अधिकारी दीपक अवस्थी से भी संपर्क नहीं हो सका।
अब सवाल उठ रहे हैं कि जब मीडिया के सवालों का जवाब नहीं दिया जा रहा तो आम जनता की शिकायतों पर कार्रवाई किस तरह होती होगी?”कैमरा सवाल पूछ रहा है, जनता जवाब मांग रही है, लेकिन जिम्मेदार खामोश हैं।”
जांच के आदेश, लेकिन जनता को कार्रवाई का इंतजार
रायसेन संभाग के डिप्टी कमिश्नर यशवंत धनोरा ने पूरे मामले की जांच कराने और संबंधित अधिकारियों से जानकारी लेने की बात कही है। लेकिन क्षेत्र की जनता का कहना है कि अब केवल जांच नहीं, ठोस कार्रवाई दिखाई देना चाहिए।
क्योंकि यह पहला मौका नहीं है जब शराब से जुड़े मामलों को लेकर सवाल उठे हों। कई बार शिकायतें हुईं, खबरें प्रकाशित हुईं, वीडियो सामने आए, लेकिन यदि उसके बाद भी कठोर कार्रवाई नहीं होती तो लोगों का व्यवस्था से भरोसा उठना स्वाभाविक है।
बड़ा सवाल
यदि गांव-गांव पहुंच रही शराब पूरी तरह वैध है तो उसका रिकॉर्ड सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता?यदि शराब का परिवहन नियमानुसार हो रहा है तो उसका दस्तावेजी प्रमाण कहां है?
यदि किराना दुकानों पर शराब नहीं बिक रही तो वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे दृश्य क्या हैं?और यदि सब कुछ नियमों के विरुद्ध है तो अब तक जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
जनता पूछ रही है…
“क्या बाड़ी क्षेत्र में शराब कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं या फिर सिस्टम ने आंखें मूंद ली हैं?”अब निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। लेकिन जनता सिर्फ जांच नहीं, जवाब चाहती है। क्योंकि वायरल वीडियो ने जो सवाल उठाए हैं, उनका जवाब पूरे आबकारी तंत्र को देना होगा।
अगर लगातार शिकायतों, वायरल वीडियो और खबरों के बावजूद कठोर कार्रवाई नहीं होती, तो फिर लोगों के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि नियम सिर्फ कागजों तक सीमित हैं या वास्तव में जमीन पर भी लागू होते हैं।
