संवाददाता : अवनीश शर्मा। गैरतगंज

गैरतगंज (मुडियाखेड़ा)। गर्मी के तीखे तेवर और बढ़ते तापमान ने जहाँ इंसानों का जीना मुहाल कर दिया है, वहीं बेजुबान पशु-पक्षी भी प्यास से बेहाल हैं। ऐसे कठिन समय में तहसील के ग्राम मुडियाखेड़ा निवासी शुभम धाकड़ (पुत्र भैरों सिंह धाकड़) ने जीव दया की एक अनूठी मिसाल पेश की है।
शुभम ने अपनी संवेदनशीलता और तकनीकी सूझबूझ का परिचय देते हुए अपने घर के बाहर बेजुबान जीवों के लिए एक ‘ऑटोमेटिक वाटर टैंक सिस्टम’ स्थापित किया है।
कैसे काम करता है यह सिस्टम?
आमतौर पर पशुओं के लिए रखे गए बर्तनों में पानी खत्म होने पर उन्हें बार-बार भरना पड़ता है, लेकिन शुभम द्वारा तैयार किया गया यह सिस्टम आधुनिक तकनीक पर आधारित है।
स्वचालित भराव: जैसे ही टैंक में पानी का स्तर कम होता है, सिस्टम स्वतः चालू होकर उसे भर देता है।
24 घंटे उपलब्धता: इससे गौ-माता और अन्य आवारा पशुओं को चौबीसों घंटे साफ़ और शीतल जल उपलब्ध रहता है।
पानी की बचत: ऑटोमेटिक होने के कारण पानी व्यर्थ नहीं बहता।

परमार्थ की भावना की प्रशंसा
ग्रामीणों का कहना है कि भीषण गर्मी के दौर में जब प्राकृतिक जल स्रोत सूख रहे हैं, तब शुभम का यह प्रयास जीवों के लिए जीवनदान साबित हो रहा है। शुभम धाकड़ के इस सेवाभावी कार्य की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है। उन्होंने सिद्ध कर दिया है कि यदि मन में सेवा का भाव हो, तो संसाधनों का सही उपयोग कर समाज और प्रकृति की रक्षा की जा सकती है।
“बेजुबान जीव अपनी प्यास बोलकर नहीं बता सकते। भीषण गर्मी को देखते हुए मैंने यह छोटा सा प्रयास किया है ताकि मेरे द्वार पर आने वाला कोई भी जीव प्यासा न लौटे।”
— शुभम धाकड़, ग्राम मुडियाखेड़ा
