—अहाते में खुली मौज, क्या आबकारी विभाग बना साझेदार ?
संवाददाता : रितिक जैन। बाड़ी

बाड़ी में शराब ठेके पर चल रही लूट का हमारी टीम ने गुप्त रूप से पहुंचकर ऐसा खुलासा किया है जिसने पूरे आबकारी सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है।
क्योंकि यहां नियम सिर्फ कागजों में हैं और जमीन पर खुलेआम उपभोक्ताओं की जेब काटी जा रही है, और सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह सब कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे धड़ल्ले से चल रहा है।
मौके पर जांच के दौरान साफ पाया गया कि सफेद क्वार्टर जिसकी MRP ₹75 है उसे ₹100 में बेचा जा रहा है, यानी हर बोतल पर सीधे-सीधे ₹25 की अतिरिक्त वसूली, वहीं बियर केन MRP ₹140 की ₹150 में और ₹150 MRP वाली बियर बोतल ₹250 तक ठोकी जा रही है, जिससे साफ है कि यह कोई छोटी मोटी गड़बड़ी नहीं बल्कि पूरी तरह से सुनियोजित लूट का खेल चल रहा है।

और मामला सिर्फ ओवररेटिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि कलारी के ठीक बगल में सोम कंपनी द्वारा एक अवैध अहाता संचालित किया जा रहा है, जहां बैठकर शराब पीने, हंगामा करने और कानून व्यवस्था को चुनौती देने का पूरा इंतजाम किया गया है, सवाल यह है कि क्या इस अहाते की अनुमति है या फिर यह भी अधिकारियों की चुप्पी की आड़ में फल-फूल रहा है।
इस पूरे मामले में स्थानीय आबकारी अधिकारी सुनील मीणा की भूमिका सबसे ज्यादा सवालों के घेरे में है, क्योंकि कई बार फोन लगाने के बावजूद उन्होंने फोन उठाना तक जरूरी नहीं समझा, जबकि पहले यही अधिकारी दावा कर चुके हैं कि ठेके पर कार्रवाई की जा चुकी है, अब सवाल यह उठता है कि कहां हुई कार्रवाई? कागजों में या हकीकत में?

वहीं जिला आबकारी अधिकारी दीपक अवस्थी ने 15 दिन की छुट्टी का हवाला देते हुए मामला व्हाट्सएप पर भेजने की बात कही, जिससे यह साफ झलकता है कि विभाग की कार्रवाई अब फील्ड में नहीं बल्कि मोबाइल स्क्रीन तक सिमट कर रह गई है, और जमीनी सच्चाई से अधिकारी आंखें चुराते नजर आ रहे हैं।
मध्यप्रदेश आबकारी नियम साफ कहते हैं कि एमआरपी से अधिक मूल्य पर शराब बेचना अपराध है, बिना अनुमति अहाता चलाना अवैध है, और दुकान परिसर में ऐसी गतिविधियां जो शांति व्यवस्था बिगाड़ें, उन्हें सख्ती से रोका जाना चाहिए, लेकिन बाड़ी में इन सभी नियमों को खुलेआम रौंदा जा रहा है और कोई देखने वाला नहीं है।
अब सबसे बड़े सवाल यही हैं कि क्या सोम कंपनी को आबकारी विभाग का संरक्षण मिला हुआ है, क्यों बार-बार शिकायतों के बाद भी कार्रवाई सिर्फ दिखावा बनकर रह जाती है, क्यों जिम्मेदार अधिकारी फोन तक उठाना जरूरी नहीं समझते, और आखिर कब तक आम जनता इस खुलेआम लूट का शिकार होती रहेगी।
अगर इस पूरे मामले में तुरंत कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो यह सिर्फ एक खबर नहीं बल्कि बड़ा जनआंदोलन बन सकता है, क्योंकि यहां सवाल सिर्फ ओवररेटिंग का नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की नीयत और जिम्मेदारी का है।
