संवाददाता: अशोक सोनी। बरेली

सचिन पुर्विया हत्याकांड का 24 घंटे में खुलासा, पुलिस की तत्परता और नेतृत्व की क्षेत्र में हो रही सराहना
साई कृष्णा ने सराहा सोहागपुर पुलिस का काम, टीम को मिला ₹10 हजार का पुरस्कार
सोहागपुर क्षेत्र के लिए 17 जून की सुबह किसी बुरे सपने से कम नहीं थी। शोभापुर निवासी और राजपूत ढाबा (अजनेरी) संचालक 28 वर्षीय सचिन पुर्विया की गोली मारकर हत्या की खबर ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया।
रानी पिपरिया नहर की पुलिया के पास मिले शव ने न केवल परिजनों बल्कि पूरे क्षेत्र में आक्रोश और भय का माहौल पैदा कर दिया था।घटना की सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आ गई।
मामला बेहद संवेदनशील था क्योंकि मृतक क्षेत्र में एक पहचान रखने वाला युवा था। हत्या की खबर फैलते ही परिजन, मित्र और समर्थक बड़ी संख्या में सोहागपुर थाने पहुंच गए। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया और थाने के सामने चक्का जाम की स्थिति बन गई।
ऐसे समय में थाना प्रभारी गिरीश त्रिपाठी ने जिस संयम और जिम्मेदारी का परिचय दिया, वह चर्चा का विषय बन गया। उन्होंने स्वयं मौके पर पहुंचकर आक्रोशित लोगों से संवाद किया। लोगों का दर्द सुना, उन्हें शांत कराया और भरोसा दिलाया कि पुलिस पूरी गंभीरता से जांच कर रही है।
उनके शब्द आज भी लोगों को याद हैं_
आप मुझ पर भरोसा करिए, मैं सुबह 5 बजे से इस मामले में लगा हूं। हमारी पूरी टीम जांच में जुटी है। हर सीसीटीवी फुटेज देखी जा रही है, हर सुराग पर काम हो रहा है। अपराधी चाहे कोई भी हो, उसे छोड़ा नहीं जाएगा।
यह सिर्फ एक अधिकारी का बयान नहीं था, बल्कि जनता के प्रति उनकी जवाबदेही और प्रतिबद्धता का प्रमाण था।इसके बाद शुरू हुआ जांच का सबसे चुनौतीपूर्ण दौर। हत्या सुनसान इलाके में हुई थी। प्रारंभिक तौर पर कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था। पुलिस के सामने सीमित सुराग थे, लेकिन टीम ने हार नहीं मानी।
थाना प्रभारी गिरीश त्रिपाठी के नेतृत्व में पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने लगातार काम किया।सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, मोबाइल कॉल डिटेल और लोकेशन का विश्लेषण किया गया, संदिग्धों से पूछताछ की गई और घटनास्थल से मिले हर छोटे-बड़े तथ्य को जोड़कर जांच आगे बढ़ाई गई।
लगातार प्रयासों का परिणाम यह हुआ कि महज 24 घंटे के भीतर पुलिस आरोपी तक पहुंच गई। जांच में सामने आया कि सीहोर जिले के होलीपुरा निवासी विवेक गुर्जर ने चरित्र संबंधी शंका के चलते इस वारदात को अंजाम दिया था।
आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया और उसकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त देशी पिस्टल, मोटरसाइकिल, मोबाइल फोन और घटना के समय पहने गए कपड़े भी बरामद कर लिए गए।यह सफलता इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि घटना के बाद क्षेत्र में भारी जनदबाव था।
लोगों की निगाहें पुलिस पर टिकी थीं।
ऐसे में कम समय में आरोपी की गिरफ्तारी ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर जनता का विश्वास मजबूत किया है।इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी साबित किया कि जब नेतृत्व मजबूत हो, टीम समर्पित हो और जांच सही दिशा में हो, तो जटिल से जटिल मामलों का भी त्वरित खुलासा संभव है।
थाना प्रभारी गिरीश त्रिपाठी और उनकी टीम ने न केवल एक अंधे हत्याकांड का पर्दाफाश किया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि अपराधी चाहे कितना भी चालाक क्यों न हो, कानून की पकड़ से बच नहीं सकता।
आज क्षेत्र में चर्चा सिर्फ आरोपी की गिरफ्तारी की नहीं है, बल्कि उस भरोसे की भी है जो एक पुलिस अधिकारी ने जनता को दिया और फिर उसे अपने काम से साबित भी किया।जनता का विश्वास जीतना आसान नहीं होता, लेकिन सचिन पुर्विया हत्याकांड में सोहागपुर पुलिस ने यह कर दिखाया।
