संवाददाता : रितिक जैन। बाड़ी

पूरा नगर रहा थम सा
बाड़ी : धार्मिक आस्था, प्राचीन मंदिरों और सांस्कृतिक विरासत के लिए पहचानी जाने वाली बाड़ी नगरी गुरुवार को एक बार फिर बोध कुर्बानी के विरोध को लेकर सुर्खियों में छाई रही। लगातार 11वें वर्ष नगर में बंद का व्यापक असर दिखाई दिया।
सुबह होते ही बाजारों के शटर नहीं खुले, प्रमुख व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे और पूरे नगर में अभूतपूर्व सन्नाटा पसरा नजर आया। आम दिनों में चहल-पहल से भरी रहने वाली बाड़ी की सड़कें सूनी दिखाई दीं और हर प्रमुख चौराहे पर पुलिस बल तैनात नजर आया।
नगर के व्यापारियों ने साफ कहा कि यह बंद किसी दबाव में नहीं बल्कि स्वेच्छा और धार्मिक भावनाओं के सम्मान में किया गया है। व्यापारियों का कहना है कि “हम अपनी इच्छा से दुकानें बंद रखते हैं, क्योंकि यह मामला हिंदू समाज की आस्था और भावनाओं से जुड़ा हुआ है।
11 वर्ष पहले भड़का था विरोध, तभी से संघर्ष का बना केंद्र
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों के अनुसार लगभग 11 वर्ष पहले बाड़ी में बोध कुर्बानी को लेकर पहली बार बड़े स्तर पर विरोध सामने आया था।
उस समय नगर में कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किए थे, ज्ञापन सौंपे गए थे और बाजार बंद रखकर विरोध दर्ज कराया गया था। बताया जाता है कि शुरुआती वर्षों में हालात इतने संवेदनशील हो गए थे कि प्रशासन को अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा था।
तब से लेकर आज तक हर वर्ष ईद-उल-अजहा के मौके पर बाड़ी संघर्ष और विरोध का केंद्र बन जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से लगातार मांग उठने के बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है, जिसके चलते लोगों में आक्रोश लगातार बना हुआ है।

धार्मिक नगरी के रूप में विशेष पहचान रखता है बाड़ी
बाड़ी नगर केवल व्यापारिक केंद्र ही नहीं बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी पूरे क्षेत्र में विशेष महत्व रखता है। नगर में स्थित हिंगलाज माता मंदिर वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इंटरनेट और स्थानीय स्रोतों में भी बाड़ी स्थित हिंगलाज माता मंदिर का उल्लेख मिलता है। इसके अलावा विंध्यवासिनी माता मंदिर भी नगर की धार्मिक पहचान का प्रमुख हिस्सा माना जाता है।
विंध्यवासिनी माता को शक्ति स्वरूप मानकर पूजा जाता है और नवरात्रि सहित विभिन्न पर्वों पर यहां विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं। नगर में स्थित प्राचीन जैन मंदिर और जैन तीर्थ क्षेत्र भी बाड़ी की ऐतिहासिक विरासत को दर्शाते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों पुरानी धार्मिक परंपराओं, मंदिरों और आस्था के केंद्रों के कारण बाड़ी को क्षेत्र की धार्मिक नगरी के रूप में पहचान मिली हुई है। इसके साथ ही श्री रामजानकी मंदिर, खेड़ापति हनुमान मंदिर, प्राचीन शिव मंदिर और अन्य धार्मिक स्थल भी नगर की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं।
“जहां तक जाना पड़ेगा जाएंगे” — एडवोकेट राकेश वर्मा
पूर्व हिंदू उत्सव समिति अध्यक्ष एडवोकेट राकेश वर्मा ने पूरे मामले पर विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि हिंदू समाज पिछले 11 वर्षों से लगातार शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा रहा है।
उन्होंने कहा,“यह केवल विरोध नहीं बल्कि हमारी आस्था, संस्कृति और धार्मिक भावनाओं का विषय है। हम लोग वर्षों से शासन और प्रशासन तक अपनी बात पहुंचा रहे हैं। जहां तक जाना पड़ेगा, हम जाएंगे, लेकिन बोध कुर्बानी बंद करवाने की मांग से पीछे नहीं हटेंगे।
”उन्होंने यह भी कहा कि नगर के व्यापारी और आमजन बिना किसी दबाव के स्वेच्छा से बंद का समर्थन करते हैं और यह आंदोलन अब जनभावनाओं से जुड़ा विषय बन चुका है।
हाई अलर्ट पर प्रशासन, चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात
ईद-उल-अजहा और नगर बंद को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह हाई अलर्ट मोड पर नजर आया। नगर के संवेदनशील क्षेत्रों, प्रमुख बाजारों और प्रवेश मार्गों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
जगह-जगह चेक पोस्ट लगाकर वाहनों की जांच की गई। पुलिस द्वारा लगातार फ्लैग मार्च और गश्त की गई ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा लगातार लोगों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की जाती रही।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने या अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पूरे नगर में पसरा रहा सन्नाटा
सुबह से शाम तक बाड़ी नगर में बंद का असर साफ दिखाई दिया। मुख्य बाजार पूरी तरह बंद रहे, सड़कों पर आमजन की आवाजाही बेहद कम रही और पूरा नगर सुरक्षा व्यवस्था तथा चर्चाओं के माहौल के बीच केंद्र में बना रहा।
धार्मिक आस्था, वर्षों पुराने संघर्ष, सामाजिक संगठनों की सक्रियता और प्रशासनिक सतर्कता के बीच बाड़ी एक बार फिर पूरे क्षेत्र में चर्चा और बहस का केंद्र बन गई।
