संवाददाता: अशोक सोनी। बरेली

हक मांगने के लिए मंत्री का काफिला रोकना पड़ेगा?
नर्मदापुरम। अगर अपनी मेहनत की कमाई पाने के लिए किसी महिला को मंत्री का काफिला रोकना पड़े, तो सवाल सिर्फ एक भुगतान का नहीं, पूरी व्यवस्था की जवाबदेही का है।
मंगलवार को जिला मुख्यालय पर ऐसा ही दृश्य देखने को मिला, जब राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी ग्राम खरगावली निवासी सपना गोस्वामी प्रभारी मंत्री की गाड़ी के सामने हाथ जोड़कर खड़ी हो गईं। आंखों में आंसू थे और जुबान पर अपनी मेहनत का बकाया।
महिला का कहना है कि वह वर्ष 2023 से राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत काम कर रही हैं, लेकिन अब तक न मानदेय मिला और न ही फेंसिंग व मजदूरी का भुगतान।
उनका आरोप है कि जनपद पंचायत माखन नगर और संबंधित अधिकारियों के चक्कर कई बार लगाए, लेकिन हर बार एक ही जवाब मिला बजट नहीं है।
सबसे गंभीर बात तब सामने आई जब महिला ने मंत्री से कहा कि लगातार भुगतान नहीं मिलने से उनका परिवार कर्ज में डूब चुका है और यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो वह परिवार सहित आत्महत्या करने को मजबूर हो जाएंगी। यह बयान घटना की गंभीरता को और बढ़ा देता है।
सवाल यह है कि यदि भुगतान वास्तव में लंबित था, तो संबंधित अधिकारियों ने समय रहते समाधान क्यों नहीं निकाला? क्या फरियादी की सुनवाई तभी होगी, जब वह मंत्री का रास्ता रोके?
क्या सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने के बाद भी किसी कर्मचारी को उसका हक नहीं मिलना सामान्य बात है? इन सवालों के जवाब प्रशासन को देने होंगे।
घटना के बाद मंत्री राकेश सिंह ने तत्काल नर्मदापुरम कलेक्टर को मामले के निराकरण के निर्देश दिए। इसके बाद डिप्टी कलेक्टर और अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की।उधर, जिला पंचायत के सीईओ ने स्वीकार किया कि महिला का मानदेय लंबित है।
जल्द भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाएगी
उन्होंने कहा कि मामले की जांच कर नियमानुसार जल्द भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। जिस महिला को अपनी बात कहने के लिए सड़क पर उतरना पड़ा, क्या उसका भुगतान इस बार वास्तव में होगा या फिर उसे एक बार फिर किसी नए आश्वासन का इंतजार करना पड़ेगा। इसका जवाब आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई ही देगी।
