अजब एमपी के गजब कारनामे: बाड़ी में सच या सेटिंग ?
संवाददाता: रितिक जैन | बाड़ी (रायसेन)

ओवररेटिंग की खबरों से हिल गया तंत्र, अब ‘वीडियो दिखाओ और मामला दबाओ’ मॉडल पर उठे गंभीर सवाल
बाड़ी। मध्यप्रदेश के रायसेन जिले का बाड़ी क्षेत्र इन दिनों एक ऐसे मामले को लेकर सुर्खियों में है, जिसने न सिर्फ आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता को कटघरे में ला खड़ा किया है।
लगातार सामने आ रही शराब की ओवररेटिंग की खबरों ने विभाग और ठेकेदारों की नींद उड़ा दी थी। लेकिन इन शिकायतों की पारदर्शी जांच करने के बजाय, अब जो तरीका अपनाया गया है, उसने पूरे मामले को और ज्यादा संदिग्ध बना दिया है।
8 सेकंड का वीडियो… और खत्म हो गई जांच?
सूत्रों के अनुसार, एक बेहद छोटा—सिर्फ 8 सेकंड का वीडियो तैयार किया गया।
वीडियो में एक व्यक्ति से “सफेद क्वार्टर” की कीमत पूछी जाती है, और वह ₹70 बताता है। इसके बाद वीडियो तुरंत खत्म हो जाता है।
न दुकान का पूरा दृश्य, न रेट लिस्ट, न बिलिंग, न अन्य ग्राहकों से पुष्टि—
सिर्फ एक व्यक्ति का जवाब और उसी के आधार पर पूरी ‘जांच’ का दावा!
यही वीडियो व्हाट्सएप ग्रुपों में वायरल कर यह संदेश दिया गया कि
👉 “खबरों की जांच की गई, कार्रवाई हुई और अब रेट सामान्य हैं।”
जांच या ‘इमेज मैनेजमेंट’?
यहीं से शुरू होते हैं सबसे बड़े सवाल—
यदि वास्तव में कार्रवाई हुई, तो उसका आधिकारिक रिकॉर्ड कहां है?
क्या दुकान पर कोई छापा, चालान या जुर्माना लगाया गया?
यदि हां, तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?
सिर्फ एक व्यक्ति से पूछकर पूरी दुकान को क्लीन चिट देना क्या नियमों के अनुरूप जांच है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पूरी कवायद
👉 “सच्चाई उजागर करने के बजाय छवि बचाने की कोशिश ज्यादा लगती है।”
जब विभाग खुद ही बना ‘मीडिया’
इस पूरे घटनाक्रम ने एक गंभीर बहस छेड़ दी है—
क्या अब अधिकारी खुद ही वीडियो बनाकर ‘जांच’ और ‘रिपोर्टिंग’ दोनों करेंगे?
अगर ऐसा है, तो फिर निष्पक्ष जांच की भूमिका कौन निभाएगा?
और मीडिया की जरूरत ही क्या रह जाएगी?
ओवररेटिंग का सच अभी भी अधूरा
सबसे अहम बात यह है कि—
ओवररेटिंग की शिकायतें पहले भी थीं और लगातार सामने आ रही थीं।
अब सवाल यह है—
अगर पहले गड़बड़ी थी, तो उस पर कठोर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
और अगर अब सुधार हुआ है, तो उसका पुख्ता और पारदर्शी प्रमाण कहां है?
नाम आया सामने: जिम्मेदारी किसकी?
इस पूरे मामले में क्षेत्रीय आबकारी अधिकारी सुनील कुमार मीणा (बरेली) का नाम प्रमुख रूप से सामने आ रहा है।
आरोप हैं कि उनके स्तर पर ही इस “वीडियो जांच” को तैयार कर वायरल किया गया।
अब सीधा सवाल यही है—
👉 क्या यह कार्रवाई उनके निर्देश पर हुई?
👉 यदि हां, तो क्या यह जांच की वैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप है?
जनता पूछ रही है—जवाब कौन देगा?
बाड़ी में लोग खुलकर कह रहे हैं—
👉 “8 सेकंड का वीडियो दिखाकर अगर पूरी सच्चाई दबाई जाएगी, तो यह कार्रवाई नहीं, जनता के साथ मजाक है।”
👉 “यह जांच नहीं, बल्कि जांच का नाटक लगता है।”
अब होगा जमीनी खुलासा
“जनाब, यह कार्रवाई थी या सिर्फ कैमरे के लिए एक्टिंग?”
इस पूरे मामले की सच्चाई जानने के लिए
👉 हमारी टीम 2 दिन बाद खुद बाड़ी की शराब दुकान पर पहुंचेगी
👉 मौके पर वीडियो रिकॉर्ड कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखेगी
अंतिम सवाल
बाड़ी का यह मामला सिर्फ एक दुकान या एक वीडियो का नहीं है—
यह उस सिस्टम की पारदर्शिता का सवाल है,
जो शिकायत आने पर कार्रवाई करने के बजाय
“वीडियो बनाकर मामला निपटाने” की कोशिश करता नजर आ रहा है।
अब फैसला जनता करेगी—
ये 8 सेकंड की ‘जांच’ थी… या सच्चाई से बचने की ‘सेटिंग’?
