संवाददाता: अशोक सोनी। बरेली

आपने सही सुना ! मध्यप्रदेश के पिपरिया के ग्राम कुर्सीखापा में खेत में खेल रहे 13 साल के मासूम पर अचानक तेंदुए ने हमला कर दिया। लेकिन ये कोई सामान्य कहानी नहीं है !
तेंदुआ हमला करता है नाखून शरीर में गड़ जाते हैंऔर उसी वक्त ये बच्चा डरकर भागता नहीं बल्कि तेंदुए की गर्दन पकड़ लेता है !
सोचिए ,13 साल का बच्चा और सामने मौत ! बच्चा जोर-जोर से चिल्लाता है परिजन दौड़ते हैं और लोगों की आवाज सुनकर तेंदुआ भाग निकलता है।
लेकिन सवाल है क्या इस बच्चे की बहादुरी को सिस्टम पहचान पाएगा?
आज वो जिला अस्पताल में भर्ती है। पैर, पेट और हाथों पर गहरे जख्म हैं। लेकिन उससे भी बड़ा जख्म तब होगाअगर समाज इस साहस को सिर्फ एक खबर बनाकर भूल गया।
क्या ऐसे बच्चों को बाल वीरता पुरस्कार नहीं मिलना चाहिए ?
क्या प्रशासन सिर्फ फाइलें चलाएगा या इस जज़्बे को सलाम भी करेगा ?
कलेक्टर सोमेश मिश्रा से मांग है इस बच्चे का नाम तत्काल बाल वीरता पुरस्कार के लिए भेजा जाए। क्योंकि अगर 13 साल की उम्र में कोई बच्चा मौत से लड़ सकता हैतो बड़ा होकर वही बच्चा समाज की ताकत बन सकता है !
ये सिर्फ एक घटना नहीं है ये नर्मदापुरम के गांव का वो साहस हैजो कैमरों से दूर पैदा होता है लेकिन इतिहास लिख देता है!
