देवनगर में भगवान परशुराम जन्मोत्सव की धूम
संवाददाता : अवनीश शर्मा। गैरतगंज

देवनगर। अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर आज देवनगर में भगवान परशुराम जन्मोत्सव का पर्व अत्यंत हर्षोल्लास, श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया।
इस उपलक्ष्य में स्थानीय ब्राह्मण समाज द्वारा एक विशाल एवं भव्य ‘चल समारोह’ (शोभायात्रा) का आयोजन किया गया, जिसने पूरे नगर को धर्ममयी और केसरिया रंग में सराबोर कर दिया।
डॉ. जय प्रकाश पटेरिया के नेतृत्व में विशाल आयोजन
यह भव्य चल समारोह ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष डॉ. जय प्रकाश पटेरिया के कुशल नेतृत्व में निकाला गया।
समारोह की शुरुआत भगवान परशुराम के चित्र पर माल्यार्पण और विशेष पूजा-अर्चना के साथ हुई। डॉ. पटेरिया ने इस अवसर पर समाज की एकता और भगवान परशुराम के आदर्शों पर चलने का आह्वान किया।
महिला मंडल और युवाओं की सक्रिय भागीदारी
शोभायात्रा की मुख्य विशेषता महिला मंडल और युवाओं की भारी संख्या में उपस्थिति रही।
पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाएँ मंगल गान और भगवान परशुराम के जयकारे लगाते हुए चल रही थीं।
युवाओं की टोली ‘जय परशुराम’ के गगनभेदी नारों और ढोल-नगाड़ों की थाप पर नृत्य करते हुए भक्ति भाव में सराबोर नजर आई।

गणमान्य जनों की गरिमामयी उपस्थिति
समारोह में समाज के वरिष्ठ जनों और क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
इस अवसर पर पंडित काशीराम दुबे, पूर्व सरपंच रमेश शर्मा, सुरेश मिश्रा व्यास और रमेश उपाध्याय जैसे प्रमुख व्यक्तित्व उपस्थित रहे।
साथ ही, प्रेम नारायण उपाध्याय, अज्जू महाराज, मोहन दुबे और हेमराज चौबे ने भी अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
शोभायात्रा में अजय शर्मा, बृज शर्मा, सुशील तिवारी, मुकेश शर्मा, दशरथ पटेरिया, और जगदीश प्रसाद पटेरिया सहित समाज के सक्रिय सदस्य शामिल हुए।
इनके अलावा रामेश्वर दुबे, कैलाश शर्मा, प्रभु दयाल भार्गव, राम मोहन, श्याम मोहन चौबे, पंडित दिनेश शास्त्री, भूषण दुबे, कैलाश पाठक, अशोक शुक्ला, किशोर महाराज, उमेश दुबे, भगवत शरण शर्मा, डॉ. प्रेम शंकर चौबे और राजू महाराज सहित सैकड़ों की संख्या में स्वजातीय बंधु उपस्थित रहे।
नगर भ्रमण और स्वागत
यह चल समारोह देवनगर के प्रमुख मार्गों और चौराहों से होता हुआ गुजरा।
नगर वासियों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर और शरबत-पानी की व्यवस्था कर शोभायात्रा का आत्मीय स्वागत किया।
पूरे मार्ग में भगवान परशुराम की आकर्षक झाँकी आकर्षण का केंद्र बनी रही।
समारोह का समापन मुख्य मंदिर पर महाआरती और महाप्रसाद वितरण के साथ हुआ, जहाँ समाज के सभी लोगों ने एकजुट होकर धर्म लाभ लिया।
यह आयोजन देवनगर के इतिहास में ब्राह्मण समाज की एकता और अटूट श्रद्धा के प्रतीक के रूप में दर्ज हो गया है।
