संवाददाता : रितिक जैन | बाड़ी

दस्तावेज नदारद, अवैध संचालन की आशंका गहरी… SDM जांच शुरू, अब प्रशासन की साख दांव पर
बाड़ी तहसील के बाबई जोड़ क्षेत्र में संचालित स्टार वेव एंटरप्राइजेज (नर्मदा राइस मिल) अब ऐसे विवाद के केंद्र में आ गई है।
जहां लगातार मिल रही शिकायतें, नोटिसों की अनदेखी और दस्तावेज प्रस्तुत न करने की स्थिति ने पूरे मामले को बेहद गंभीर बना दिया है, और अब यह प्रकरण प्रशासनिक कार्रवाई की निर्णायक स्थिति तक पहुंच चुका है।

जानकारी के अनुसार, जनपद पंचायत बाड़ी के CEO ने स्पष्ट रूप से संज्ञान लेते हुए SDM बरेली को पत्र भेजा, जिसमें उल्लेख किया गया कि मिल प्रबंधन को निर्धारित समय-सीमा में आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे।
लेकिन तय समय बीतने के बाद भी कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए, जिससे प्रथम दृष्टया यह संकेत मिलता है।
कि मिल के पास ग्राम पंचायत की अनुमति (NOC) सहित जरूरी स्वीकृतियां नहीं हो सकतीं और संचालन नियमों के विपरीत किया जा रहा है।

दस्तावेजों का प्रस्तुत न होना अब पूरे मामले का सबसे गंभीर बिंदु बन गया है, क्योंकि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि प्रशासनिक आदेशों की सीधी अवहेलना के रूप में देखा जा रहा है।
इस पूरे मामले पर जब SDM संतोष मुद्गल (बरेली) से बात की गई, तो उन्होंने पुष्टि की कि पत्र प्राप्त हो चुका है और मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित विभाग को जांच के लिए पत्र जारी कर दिया गया है।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि जांच रिपोर्ट प्राप्त होते ही नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जमीन पर हालात को लेकर ग्रामीणों के आरोप भी बेहद गंभीर हैं, जिनके अनुसार मिल से निकलने वाला काला और दुर्गंधयुक्त पानी खेतों में छोड़ा जा रहा है।
जिससे फसलें बर्बाद हो रही हैं, वहीं हवा में उड़ती भूसी और राख के कारण पूरा इलाका प्रदूषण से प्रभावित है।
जिससे लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है और जीवन प्रभावित हो रहा है।
इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू यह भी है कि मिल के लगभग 50 मीटर की दूरी पर संचालित गुरुकुल पद्धति का स्कूल भी इस प्रदूषण से प्रभावित बताया जा रहा है।
जहां बच्चों को मास्क लगाकर पढ़ाई करनी पड़ रही है, ऐसे में यह सवाल और भी गंभीर हो जाता है कि क्या इस प्रकार की औद्योगिक इकाई का संचालन शैक्षणिक संस्थान के इतने नजदीक नियमों के अनुरूप है।
नियमों के अनुसार बिना पंचायत अनुमति उद्योग संचालन, बिना ट्रीटमेंट अपशिष्ट जल छोड़ना और प्रदूषण नियंत्रण मानकों का उल्लंघन दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।
ऐसे में यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो मिल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब यह मामला पूरी तरह जांच के अधीन है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल प्रशासन पर खड़ा हो रहा है कि
- जब समय-सीमा में दस्तावेज तक प्रस्तुत नहीं किए गए, तो अब तक सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- क्या बार-बार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई में देरी उचित है?
बाबई जोड़ की यह राइस मिल अब एक सामान्य विवाद नहीं रही, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही और कार्रवाई की वास्तविकता की परीक्षा बन चुकी है।
जहां एक ओर किसानों और स्थानीय लोगों की समस्या है, वहीं दूसरी ओर कानून के पालन की जिम्मेदारी है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच के बाद प्रशासन कितनी सख्ती दिखाता है।
अगर इस बार भी कार्रवाई नहीं होती है, तो सवाल सिर्फ मिल पर नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर खड़े होंगे।
