संवाददाता : रितिक जैन। बाड़ी

रायसेन के बाड़ी क्षेत्र में राइस मिलों की बॉयलर राख डंपिंग से बढ़ा प्रदूषण संकट, हाईवे किनारे जमा कचरे से आसपास के गांव प्रभावित
रायसेन जिले के बाड़ी क्षेत्र में नेशनल हाईवे-45 के किनारे बॉयलर राख का खुलेआम डंप किया जाना गंभीर पर्यावरणीय संकट बनता जा रहा है। धनाश्री गांव के पास हाईवे से सटे खुले क्षेत्र में काली राख के बड़े-बड़े ढेर देखे जा रहे हैं, जो तेज हवा के साथ उड़कर आसपास के गांवों और खेत-खलिहानों तक फैल रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार यह बॉयलर राख चारगांव स्थित फॉर्च्यून राइस मिल और बरेली वर्मा राइस मिल से निकलकर ट्रकों के जरिए इस स्थान पर लाई जा रही है और खुले में डंप की जा रही है। लगातार हो रही इस गतिविधि से पूरे क्षेत्र का पर्यावरण प्रभावित हो रहा है।

1: NH-45 किनारे अवैध डंपिंग का गंभीर मामला
नेशनल हाईवे-45 के बेहद करीब खुले मैदान में बड़ी मात्रा में औद्योगिक अपशिष्ट यानी बॉयलर राख का भंडारण किया जा रहा है।
तेज हवा चलने पर यह राख उड़कर हाईवे और आसपास के क्षेत्रों में फैल जाती है, जिससे धूल का घना गुबार बन जाता है।
यह स्थिति सड़क सुरक्षा और पर्यावरण दोनों के लिए गंभीर खतरा मानी जा रही है।
2: राइस मिलों से जुड़ता स्रोत
बताया जा रहा है कि यह राख चारगांव स्थित फॉर्च्यून राइस मिल और बरेली वर्मा राइस मिल से निकलकर ट्रकों के माध्यम से यहां पहुंचाई जा रही है।
औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट का सुरक्षित निस्तारण न कर उसे खुले स्थान पर डंप किया जाना पर्यावरणीय नियमों की गंभीर अनदेखी माना जा रहा है।
3: आसपास के गांवों तक फैलता असर
हाईवे किनारे जमा राख अब हवा के साथ उड़कर आसपास के गांवों तक पहुंच रही है।
धनाश्री गांव सहित आसपास के क्षेत्रों में लगातार धूल की परत जमने लगी है, जिससे वातावरण प्रदूषित बना हुआ है।
कृषि भूमि पर राख के कण जमने से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है।

4: पर्यावरण नियमों का उल्लंघन
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों के अनुसार बॉयलर राख का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण अनिवार्य है।
इसे निर्धारित लैंडफिल साइट या औद्योगिक उपयोग की प्रक्रिया के तहत ही निपटाया जाना चाहिए।
लेकिन इस मामले में खुले में डंपिंग कर नियमों की अनदेखी के संकेत सामने आए हैं।
5: प्रदूषण का बढ़ता खतरा
हवा में उड़ती राख के महीन कण वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं।
इससे आसपास के इलाकों में धूल प्रदूषण बढ़ता जा रहा है और सांस संबंधी समस्याओं की आशंका भी जताई जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह का अनियंत्रित प्रदूषण लंबे समय में गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है।
6: प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल
हाईवे जैसे संवेदनशील क्षेत्र के पास इतनी बड़ी मात्रा में राख डंपिंग का जारी रहना निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
स्थानीय स्तर पर रोकथाम न होना प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है।
7: प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की प्रतिक्रिया
मामले को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मंडीदीप के क्षेत्रीय अधिकारी बृजेश शर्मा से चर्चा की गई।
उन्होंने मामले को गंभीर बताते हुए जांच कर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की बात कही है।
निष्कर्ष:
NH-45 किनारे फैला यह राख का ढेर अब केवल अवैध डंपिंग नहीं, बल्कि आसपास के गांवों के लिए बढ़ता पर्यावरणीय खतरा बन चुका है।
यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो यह स्थिति आने वाले दिनों में और गंभीर रूप ले सकती है, जिसका सीधा असर जनजीवन और पर्यावरण दोनों पर पड़ेगा।
