घंटों बाहर खड़े रहते हैं बच्चे
संवाददाता : अवनीश शर्मा। गैरतगंज

गैरतगंज (रायसेन): शासन द्वारा शिक्षा के स्तर को सुधारने और उच्च गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्रदान करने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है।
विकासखंड गैरतगंज के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा विभाग के लापरवाह शिक्षकों और जिम्मेदार अधिकारियों की कथित “सांठ-गांठ” के कारण सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं।
ताजा मामला: ग्राम कर्मोदी का हाल
शिक्षा विभाग की बदहाली का ताजा उदाहरण ग्राम कर्मोदी में देखने को मिला है।
यहाँ ग्रामीणों ने स्कूल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि सरकारी स्कूल कभी भी अपने निर्धारित समय पर नहीं खुलता है।
घंटों इंतजार: ग्रामीणों के अनुसार, सुबह बच्चे स्कूल तो पहुंच जाते हैं, लेकिन ताला खुलने के इंतजार में उन्हें घंटों बाहर खड़ा रहना पड़ता है।
जब ‘मैडम’ अपनी मर्जी से स्कूल पहुंचती हैं, तब जाकर स्कूल के ताले खुलते हैं।
अनिश्चित समय: स्कूल न केवल देरी से खुलता है, बल्कि बंद होने का समय भी शिक्षकों की सुविधा के अनुसार तय होता है।
शिक्षा का स्तर गिरा, शिकायतों पर नहीं हो रहा गौर
ग्रामीणों का कहना है कि समय की पाबंदी न होने का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
कई बच्चे ऐसे हैं जो बुनियादी किताबें तक ठीक से नहीं पढ़ पा रहे हैं।
“हमने कई बार संबंधित विभाग और अधिकारियों से इसकी शिकायत की, लेकिन ढाक के तीन पात वाली स्थिति बनी हुई है। कोई भी सुधार की दिशा में कदम नहीं उठा रहा है।” — स्थानीय ग्रामीण
अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल
नया शिक्षा सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन शिक्षकों के रवैये में कोई बदलाव नहीं आया है।
ग्रामीणों ने अब जिला प्रशासन से मांग की है कि लापरवाह शिक्षकों पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि बच्चों का भविष्य अंधकार में जाने से बच सके।
