संवाददाता: अशोक सोनी। बरेली

कहीं ताले, कहीं लंबी कतारें…
आखिर कृत्रिम संकट या सचमुच ईंधन की किल्लत?
बाड़ी, रायसेन। रायसेन जिले की बाड़ी तहसील में इन दिनों पेट्रोल-डीजल और सीएनजी को लेकर अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है।
हालात ऐसे हैं कि 40 डिग्री की तपती गर्मी में लोग घंटों लाइन में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, तो कई पेट्रोल पंपों पर “स्टॉक खत्म” के बोर्ड और ताले लटकते दिखाई दे रहे हैं।
सबसे ज्यादा परेशानी सीएनजी वाहन चालकों को झेलनी पड़ रही है। कई वाहन चालक सुबह से शाम तक चक्कर काट रहे हैं, लेकिन गैस नहीं मिल पा रही।
उधर डीजल-पेट्रोल की बढ़ती भीड़ ने आम लोगों के मन में सवाल खड़ा कर दिया है — क्या देश वास्तव में ईंधन संकट की ओर बढ़ रहा है या फिर यह कृत्रिम कमी पैदा कर कालाबाजारी और मुनाफाखोरी का खेल खेला जा रहा है?
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से अपील की थी कि अति आवश्यक होने पर ही डीजल-पेट्रोल का उपयोग करें और ईंधन की बचत करें। प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद अब लोग इसे मौजूदा हालात से जोड़कर देख रहे हैं। कई जगह लोगों का कहना है कि “जब प्रधानमंत्री खुद बचत की अपील कर रहे हैं, तो कहीं न कहीं संकट जरूर है।”
बाड़ी के पेट्रोल पंपों पर सुबह से लंबी कतारें लग रही हैं। बाइक, कार, ट्रैक्टर और मालवाहक वाहन चालकों में जल्द से जल्द टंकी फुल कराने की होड़ मची हुई है। कई लोगों का आरोप है कि कुछ पंप संचालक सीमित मात्रा में ही ईंधन दे रहे हैं, जिससे लोगों में घबराहट और बढ़ रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि सप्लाई सामान्य है तो फिर अचानक पंपों पर यह अव्यवस्था क्यों दिखाई दे रही है? आखिर क्यों लोग तपती धूप में घंटों लाइन में खड़े होने को मजबूर हैं?
प्रशासन ने साधी चुप्पी
फिलहाल प्रशासन की ओर से स्थिति को लेकर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। लेकिन बाड़ी में बनते हालात ने यह जरूर संकेत दे दिया है कि ईंधन को लेकर लोगों के मन में डर और असमंजस गहराने लगा है। अगर जल्द स्थिति स्पष्ट नहीं हुई तो यह भीड़ और अफवाहें आने वाले दिनों में और बड़ा संकट खड़ा कर सकती हैं।
