संवाददाता: अशोक सोनी। बरेली

दो दिवसीय उद्यानिकी कृषक सेमीनार एवं प्रदर्शनी का समापन
जिले में कृषि विज्ञान केन्द्र नकतरा में उद्यानिकी विभाग द्वारा एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के तहत आयोजित दो दिवसीय जिला स्तरीय कृषक सेमीनार एवं प्रदर्शनी का बुधवार को समापन हुआ।
समापन कार्यक्रम में कलेक्टर अरूण कुमार विश्वकर्मा, जनपद सदस्य देवेन्द्र कुशवाह तथा अन्य जनप्रतिनिधि और उद्यानिकी तथा कृषि विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में कलेक्टर अरूण विश्वकर्मा ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि जिले में परम्परागत फसलों धान-गेहूं की खेती बहुतायत में की जा रही है।
जिसमें अधिक लागत आती है और मुनाफा काफी कम होता है! जबकि उद्यानिकी फसलें अदरक, हल्दी, धनिया, लहसुन में उत्पादन अधिक होने से मुनाफा लगभग 1 से 1.5 लाख रूपए प्रति एकड़ तक होता है।
इसी तरह फलदार बगीचा आम, अमरूद, चीकू, सीताफल आदि से भी प्रति एकड़ मुनाफा अधिक होता है। किसान भाई खाद्य फसलों के साथ-साथ फलदार बगीचा व उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती करके अपनी आमदनी में वृद्धि कर सकते हैं।
कलेक्टर विश्वकर्मा ने किसानों से नरवाई नहीं जलाने का आव्हान करते हुए कहा कि नरवाई में आग नहीं लगाकर स्ट्रॉ रीपर मशीन का उपयोग कर भूसा बनाएं।
इसके अतिरिक्त रोटावेटर का उपयोग कर नरवाई को मिट्टी में मिलाने से यह मिट्टी की उत्पादकता को बढ़ाती है।
उन्होंने कहा कि नरवाई जलाने से मिट्टी के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है तथा कई बार नरवाई की आग गंभीर दुर्घटनाओं का कारण भी बनती है।
जिला स्तरीय कृषक सेमीनार एवं प्रदर्शनी के अंतिम दिवस कृषक सुदीप चौरसिया द्वारा केंचुआ खाद उत्पादन पर, कृषक रणधीर पुनिया द्वारा जैविक तरीके से टमाटर उत्पादन पर.
कृषक झलकन शाक्या द्वारा फलदार बगीचा व प्राकृतिक खेती, कृषक पर्वत कुशवाह द्वारा लो कॉस्ट शेड नेट हाउस पर खीरा उत्पादन पर विस्तारपूर्वक अनुभव साझा किये।
सहायक संचालक उद्यानिकी नीलम पाटिल ने उद्यानिकी के क्षेत्र में सघन बागवानी, संरक्षित खेती, ड्रिप, मल्चिंग तकनीक, प्रो-ट्रे तकनीक, जरबेरा व गुलाब उत्पादन सम्बन्धी तकनीकी जानकारी कृषकों को दी।
औबेदुल्लागंज की उद्यान अधिकारी रचना निमाड़े द्वारा बताया गया कि महिला कृषक गायत्री अहिरवार द्वारा 4000 वर्ग.मी. छायादार नेट हाउस में शिमला मिर्च व 2000 वर्ग.मी. पॉली हाउस में गुलाब का उत्पादन किया जा रहा है।
बेगमगंज की उद्यान अधिकारी कु. देवकी मरकाम द्वारा बताया गया कि ग्राम सुनेरा में 18 से 20 कृषकों के द्वारा चिया सीड, अश्वगंधा, रजगिरा, कुसुम आदि 70 से 80 एकड़ में लगाया गया है।
इसी प्रकार बाड़ी के उद्यान अधिकारी राकेश जाट द्वारा बताया गया कि ग्राम बगलवाड़ा के आस-पास क्लस्टर में लगभग 150 एकड़ क्षेत्रफल में चिया व अश्वगंधा की खेती की जा रही है।
कार्यक्रम में उप संचालक केपी भगत ने बताया कि फसलों की उत्पादन वृद्धि हेतु फसल चक्र व फसल विविधिकरण के अन्तर्गत अदरक, हल्दी, आलू, धनिया, कलौंजी, पपीता फसलों की खेती की अपार सम्भावनाऐं हैं।
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. स्वप्निल दुबे ने कृषकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि किसान लघु उद्योग लगाकर खाद्य प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, टमाटर की प्यूरी बनाना, प्याज व लहसुन का पेस्ट बनाना, आलू का पाउडर बनाना, फसलों को अधिक दिन तक संरक्षित कर उचित मूल्य प्राप्त कर सकते हैं।
उद्यानिकी वैज्ञानिक मुकुल कुमार द्वारा बताया गया कि किसान पौध रोपण एवं टपक सिंचाई पद्धति का प्रयोग कर कम से कम क्षेत्रफल में भी लाभ प्राप्त कर सकता है.
तथा परम्परागत खेती के अलावा उद्यानिकी के अन्तर्गत फल-बगीचा, फूलों की खेती, ड्रिप व मल्चिंग तकनीक पर सब्जियों की खेती कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। कार्यक्रम में सुनील सोने सहायक संचालक कृषि, वैज्ञानिक डॉ. मुकुल कुमार, रंजीत सिंह राघव, डॉ. प्रदीप कुमार द्विवेदी, डॉ. अंशुमान गुप्ता भी उपस्थित थे।
