संवाददाता: अशोक सोनी। बरेली

सहजपुरी – रायसेन जिले की सिलवानी तहसील अंतर्गत ग्राम सहजपुरी, ग्राम पंचायत खमरिया मानपुर में चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ।
नौ दिवसीय इस पावन अनुष्ठान के दौरान समस्त ग्राम में माता जगदम्बा की आराधना, दुर्गा सप्तशती पाठ, भजन-कीर्तन एवं मंगलमय अनुष्ठानों से दिव्य चेतना का संचार होता रहा।
ग्राम में पंडित लक्ष्मी नारायण दुबे (पंडा जी), जो कि श्रद्धेय पंडित श्री परमानंद दुबे जी के सुपुत्र हैं, के पावन निवास पर आदिशक्ति भगवती की विधिवत स्थापना कर शास्त्रोक्त विधान से पूजन-अर्चन किया गया।
उनके सान्निध्य में संपन्न यह अनुष्ठान ग्रामवासियों के लिए धर्म, संस्कार और श्रद्धा का सशक्त प्रेरणास्रोत बना।
इस पावन आयोजन में पंडित अमित चौबे एवं पंडित विष्णु प्रसाद दीक्षित का उल्लेखनीय सहयोग रहा।
साथ ही नीरज शर्मा एवं हरिनारायण राजौरिया , रामसेवक राजौरिया , सुमित राजौरिया , सूरज शर्मा , अनुज शर्मा एवं कृष्णा दुबे की सक्रिय सहभागिता ने पूरे कार्यक्रम को सुव्यवस्थित, अनुशासित एवं सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
नवरात्रि की पूर्णाहुति पर जवारे विसर्जन यात्रा अत्यंत श्रद्धा, अनुशासन और भक्तिभाव के साथ निकाली गई।
यात्रा की विशेषता रही कि नन्हीं बालिकाओं ने अपने शीश पर जवारे धारण कर मातृशक्ति के प्रति समर्पण, पवित्रता और श्रद्धा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया, जिससे संपूर्ण वातावरण भाव-विभोर हो उठा।
ढोल-नगाड़ों की मंगल ध्वनि एवं “जय माता दी” के गगनभेदी जयकारों के मध्य यात्रा मंदिर प्रांगण में पहुंची, जहां विधिपूर्वक माता रानी के श्रीचरणों में पूजन-अर्चन कर पूर्णाहुति दी गई तथा श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरण किया गया।
इस अवसर पर समस्त ग्रामवासी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे, जिससे वातावरण पूर्णतः भक्ति, एकता और सांस्कृतिक चेतना से ओतप्रोत हो उठा।
यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि ग्राम में सामाजिक समरसता, सनातन संस्कृति के संरक्षण और आपसी सद्भाव को सुदृढ़ करने वाला भी सिद्ध हुआ।
पंडित श्री लक्ष्मी नारायण दुबे जी के मार्गदर्शन में संपन्न यह अनुष्ठान सभी के लिए प्रेरणादायक एवं अनुकरणीय बना।
पंडित श्री लक्ष्मी नारायण दुबे जी का दिव्य एवं प्रेरणादायक उपदेश
अंत में पंडित श्री लक्ष्मी नारायण दुबे जी ने अपने उद्बोधन में कहा—
“नवरात्रि केवल पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, साधना और शक्ति के जागरण का दिव्य अवसर है।
आदिशक्ति भगवती की आराधना हमें यह संदेश देती है कि जब तक हमारे भीतर सत्य, करुणा, संयम और सेवा की भावना जागृत नहीं होती, तब तक भक्ति अधूरी रहती है।
माता रानी की कृपा उसी पर होती है, जो अपने जीवन में धर्म के मार्ग पर चलकर, अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करता है और समाज में सद्भाव, सहयोग एवं संस्कारों का प्रसार करता है।
यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने आचरण को पवित्र बनाए, अपने विचारों को श्रेष्ठ बनाए और अपने कर्मों को समाजहित में समर्पित करे, तो न केवल उसका जीवन धन्य होता है, बल्कि संपूर्ण समाज और राष्ट्र भी उन्नति के पथ पर अग्रसर होता है। यही सच्ची आराधना और वास्तविक नवरात्रि का संदेश है।”
अंत में समस्त ग्रामवासियों ने माता जगदम्बा से ग्राम, क्षेत्र एवं देश की सुख-समृद्धि, शांति और निरंतर उन्नति की मंगल कामना की।
