संवाददाता: अशोक सोनी। बरेली

कागज छोड़ो, जमीन बताओ काम हुआ कि बस दिखावा?
केसला तहसील में इस बार जो हुआ, वो सिर्फ सरकारी दौरा नहीं था ये असली हकीकत जांच थी। कलेक्टर सोमेश मिश्रा जब पहुंचे, तो माहौल ही बदल गया।
जहां पहले फाइलों में काम पूरा दिखता था, वहां अब जमीन पर सच सामने आने लगा।
उपार्जन केंद्र पर पहुंचे तो सीधे मुद्दे पर बात गेहूं ठीक है या नहीं? किसान को इंतजार क्यों? तुलाई समय पर हो रही है या नहीं? मतलब साफ अब दिखावे से काम नहीं चलेगा, हर चीज मौके पर परखी जाएगी।
किसानों से भी सीधे पूछ लिया कोई दिक्कत तो नहीं? इससे साफ हो गया कि बात सिर्फ अफसरों की रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहने वाली।
जनपद पंचायत में पहुंचे तो पुराने ढर्रे पर चल रहे कामों पर सीधा सवाल लक्ष्य पूरा क्यों नहीं हुआ? जो पीछे हैं, उनसे जवाब क्यों न लिया जाए? यहां साफ संकेत दे दिया गया कि अब काम नहीं करने वालों पर नोटिस का डंडा भी चलेगा।
राजस्व दफ्तर में तो जैसे सालों से अटकी फाइलों की सांस अटक गई। दो-दो साल से पड़े प्रकरणों को लेकर साफ आदेश अब और नहीं, तय समय में निपटाओ। यानी अब कल करेंगे वाली आदत पर ब्रेक लगने वाला है।और जब स्कूल पहुंचे, तो नजर सिर्फ दीवारों पर नहीं थी।
बच्चों की सुरक्षा, पानी, सफाई, बारिश में टपकने वाली छत ,हर छोटी चीज पर ध्यान गया। जैसे कोई अपना घर देख रहा हो, वैसी पड़ताल। अब प्रशासन दूर बैठकर नहीं चलेगा। साहब खुद मैदान में हैं, तो बहाने नहीं चलेंगे।
अब काम करना पड़ेगा, नहीं तो कुर्सी भी हिल सकती है।
